रवि : बताओ लव मैरिज और अरेंज मैरिज में क्या अंतर है ?
दीपक : अगर हम खुद कुएं में कूद जाएं, तो यह लव मैरिज है। और अगर दस आदमी हमें धक्का देकर कुएं में गिरा दें , तो वह अरेंज मैरिज कहलाती है।
Saturday, June 28, 2008
SMS
मां : बेटा केला खाओगे ?
बेटा : नहीं मम्मी।
मां : बर्फी खाओगे ?
बेटा : नहीं मम्मी।
मां : काजू खाओगे ?
बेटा : नहीं मम्मी।
मां : बिल्कुल अपने बाप पर गया है , मार ही खाएगा।
बेटा : नहीं मम्मी।
मां : बर्फी खाओगे ?
बेटा : नहीं मम्मी।
मां : काजू खाओगे ?
बेटा : नहीं मम्मी।
मां : बिल्कुल अपने बाप पर गया है , मार ही खाएगा।
SMS
मां , बेटे सेः कहां गए थे ?
बेटाः गर्लफ्रेंड से मिलने।
मां : किसलिए ?
बेटाः हां , बहुत किस लिए !
बेटाः गर्लफ्रेंड से मिलने।
मां : किसलिए ?
बेटाः हां , बहुत किस लिए !
HANSHI
महंगाई अब राष्ट्रीय महत्व की चीज हो गई है। इतनी कि प्रधानमंत्री को दूरदर्शन पर आकर बताना पड़ा कि यह क्यों जरूरी है। अब तक सरकार इसे बहुत महत्व नहीं दे रही थी। कहते हैं कि उसकी वजह से चुनाव तक हार रही थी, फिर भी उसे कोई महत्व नहीं देना चाहती थी। इसीलिए उसकी ओर देख भी नहीं रही थी। आंखें चुरा रही थी। पहचानने तक से इनकार कर रही थी। लोगों ने बहुत हाय-तौबा मचायी तो भी उसने उसे हल्के-फुल्के ढंग से ही टालने की कोशिश की -यह तो ग्लोबल है यार। फ्री में मिल रही है। जो अमेरिका और यूरोप में मिल रही है, वही तुम्हें भी मिल रही है। न डुप्लीकेट है, न इंडिया में बनी है और सस्तेवाला चीनी माल तो बिल्कुल भी नहीं है। ऐसा मौका कब-कब मिलता है। लूट लो। मजे लो। सरकार ऐसे कह रही थी, जैसे अमेरिका-यूरोपवाला सुख फ्री में मिल रहा हो।
पर महंगाई कोई राम-नाम की लूट तो है नहीं कि लूट सको तो लूट लो। हालांकि लूट के नाम पर जनता तो सिर्फ वही लूट सकती है। बाकी कुछ लूटने का मौका नेता, अफसर, ठेकेदार, माफिया वगैरह उसे कहां देते हैं। सब तो खुद ही लूट ले जाते हैं। फिर महंगाई की लूट के बारे में तो यही कहा जाता है कि वह तो सेठ, सटोरिए और कालाबाजारिए ही मचाते हैं। वह शुद्ध उन्हीं के लिए होती है। सो महंगाई की मार से जनता बिलबिलाती रही। सरकार ने फिर समझाया -देखो यार, यह पूरी दुनिया में है। हमारे लिए कोई अनोखी थोड़े है। पर जनता के साथ जब विपक्ष और सहयोगी भी हाय-तौबा मचाने लगे और यह नहीं थमी तो सरकार का धैर्य जवाब दे गया। बोली- हमारे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है।
पर अब महंगाई राष्ट्रीय महत्व की चीज हो गई है। वैसे ही जैसे स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस होते हैं। इसलिए स्वयं प्रधानमंत्री को दूरदर्शन पर आकर बताना पड़ा कि यह क्यूं जरूरी है। हालांकि वह दूरदर्शन पर उस तरह नहीं आए, जैसे स्वाधीनता दिवस वगैरह पर आया करते हैं रस्मी तौर पर। वह दूरदर्शन पर वैसे भी नहीं आए जैसे राष्ट्रीय आपदा के वक्त आया करते हैं। वह दूरदर्शन पर वैसे भी नहीं आए जैसे बाबरी मस्जिद तोड़े जाने के बाद नरसिंह राव आए थे और उन्होंने मस्जिद दोबारा बनाने का वादा किया था। वह दूरदर्शन पर वैसे भी नहीं आए, जैसे इंदिराजी रेडियो पर आई थी, इमरजेंसी की घोषणा की थी और बताया था कि वह क्यों जरूरी है।
प्रधानमंत्री तो दूरदर्शन पर यह बताने आए कि महंगाई क्यों जरूरी है। इससे पता चलता है कि महंगाई राष्ट्रीय महत्व की चीज हो गई है। यह महंगाई की जीत है कि कल तक जो सरकार उसको कोई महत्व नहीं देती थी, उसी सरकार के प्रधानमंत्री को उसने दूरदर्शन पर आकर यह बताने को मजबूर कर दिया कि वह क्यों जरूरी है। अब तक महंगाई बाजार से आती थी, जनता हाय-तौबा मचाती थी, दुकानदार भी रोना रोते थे, लेकिन उसका महत्व क्या था। वैसे भी आलू-प्याज और आटे-दाल से महत्व नहीं बनता, सिर्फ हाय-तौबा मचती है। जब तक शासकों से रिकगनिशन न मिले तब तक मजा नहीं आता। उसने तो अमेरिका-यूरोप से आकर भी देख लिया। फिर भी शासकों ने उसे कोई महत्व नहीं दिया। इसलिए वह खूब फली बढ़ी और सरकार को मजबूर किया कि वह उसके महत्व को स्वीकार करे। इसीलिए अब वह वाया दूरदर्शन आई है।
दूरदर्शन पर आकर प्रधानमंत्री ने बताया कि महंगाई भावी पीढ़ियों के लिए जरूरी है। उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए जरूरी है। उनकी सुख-समृद्धि के लिए जरूरी है। अभी तक यही माना जाता था कि भावी पीढ़ियों के लिए अच्छी शिक्षा जरूरी है। अच्छा स्वास्थ्य जरूरी है। सड़क-बिजली-पानी वाला विकास का बुनियादी ढांचा जरूरी है। रोजगार की बेहतर सुविधाएं जरूरी हैं। अच्छी कृषि और अच्छा उद्योग जरूरी है। जरूरी है कि भूख-बीमारी और बदहाली खत्म हो। जरूरी है कि मेहनत का फल मिले। पर प्रधानमंत्री ने कहा कि भावी पीढि़यों के उज्ज्वल भविष्य के लिए और उनकी सुख-समृद्धि के लिए महंगाई जरूरी है।
पर महंगाई कोई राम-नाम की लूट तो है नहीं कि लूट सको तो लूट लो। हालांकि लूट के नाम पर जनता तो सिर्फ वही लूट सकती है। बाकी कुछ लूटने का मौका नेता, अफसर, ठेकेदार, माफिया वगैरह उसे कहां देते हैं। सब तो खुद ही लूट ले जाते हैं। फिर महंगाई की लूट के बारे में तो यही कहा जाता है कि वह तो सेठ, सटोरिए और कालाबाजारिए ही मचाते हैं। वह शुद्ध उन्हीं के लिए होती है। सो महंगाई की मार से जनता बिलबिलाती रही। सरकार ने फिर समझाया -देखो यार, यह पूरी दुनिया में है। हमारे लिए कोई अनोखी थोड़े है। पर जनता के साथ जब विपक्ष और सहयोगी भी हाय-तौबा मचाने लगे और यह नहीं थमी तो सरकार का धैर्य जवाब दे गया। बोली- हमारे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है।
पर अब महंगाई राष्ट्रीय महत्व की चीज हो गई है। वैसे ही जैसे स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस होते हैं। इसलिए स्वयं प्रधानमंत्री को दूरदर्शन पर आकर बताना पड़ा कि यह क्यूं जरूरी है। हालांकि वह दूरदर्शन पर उस तरह नहीं आए, जैसे स्वाधीनता दिवस वगैरह पर आया करते हैं रस्मी तौर पर। वह दूरदर्शन पर वैसे भी नहीं आए जैसे राष्ट्रीय आपदा के वक्त आया करते हैं। वह दूरदर्शन पर वैसे भी नहीं आए जैसे बाबरी मस्जिद तोड़े जाने के बाद नरसिंह राव आए थे और उन्होंने मस्जिद दोबारा बनाने का वादा किया था। वह दूरदर्शन पर वैसे भी नहीं आए, जैसे इंदिराजी रेडियो पर आई थी, इमरजेंसी की घोषणा की थी और बताया था कि वह क्यों जरूरी है।
प्रधानमंत्री तो दूरदर्शन पर यह बताने आए कि महंगाई क्यों जरूरी है। इससे पता चलता है कि महंगाई राष्ट्रीय महत्व की चीज हो गई है। यह महंगाई की जीत है कि कल तक जो सरकार उसको कोई महत्व नहीं देती थी, उसी सरकार के प्रधानमंत्री को उसने दूरदर्शन पर आकर यह बताने को मजबूर कर दिया कि वह क्यों जरूरी है। अब तक महंगाई बाजार से आती थी, जनता हाय-तौबा मचाती थी, दुकानदार भी रोना रोते थे, लेकिन उसका महत्व क्या था। वैसे भी आलू-प्याज और आटे-दाल से महत्व नहीं बनता, सिर्फ हाय-तौबा मचती है। जब तक शासकों से रिकगनिशन न मिले तब तक मजा नहीं आता। उसने तो अमेरिका-यूरोप से आकर भी देख लिया। फिर भी शासकों ने उसे कोई महत्व नहीं दिया। इसलिए वह खूब फली बढ़ी और सरकार को मजबूर किया कि वह उसके महत्व को स्वीकार करे। इसीलिए अब वह वाया दूरदर्शन आई है।
दूरदर्शन पर आकर प्रधानमंत्री ने बताया कि महंगाई भावी पीढ़ियों के लिए जरूरी है। उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए जरूरी है। उनकी सुख-समृद्धि के लिए जरूरी है। अभी तक यही माना जाता था कि भावी पीढ़ियों के लिए अच्छी शिक्षा जरूरी है। अच्छा स्वास्थ्य जरूरी है। सड़क-बिजली-पानी वाला विकास का बुनियादी ढांचा जरूरी है। रोजगार की बेहतर सुविधाएं जरूरी हैं। अच्छी कृषि और अच्छा उद्योग जरूरी है। जरूरी है कि भूख-बीमारी और बदहाली खत्म हो। जरूरी है कि मेहनत का फल मिले। पर प्रधानमंत्री ने कहा कि भावी पीढि़यों के उज्ज्वल भविष्य के लिए और उनकी सुख-समृद्धि के लिए महंगाई जरूरी है।
chutkele
संता चलती बस में चिल्लाएः हाय , मेरी जेब कट गई। किसी ने 10,000 रुपये निकाल लिए।
बंता उनको दिलासा देते हुए बोले : चिंता मत कीजिए संता जी , समझ लीजिएगा , इन्कम टैक्स वाले ले गए।
बंता उनको दिलासा देते हुए बोले : चिंता मत कीजिए संता जी , समझ लीजिएगा , इन्कम टैक्स वाले ले गए।
बेस्ट अस्म्स
खुदा करे तेरा मोबाइल खो जाए ,
मिले मुझे और मेरा हो जाए।
करूं एसएमएस लड़कियों को, नाम तेरा आए,
मार तुझे पड़े और कलेजा मेरा ठंडा हो जाए।
मिले मुझे और मेरा हो जाए।
करूं एसएमएस लड़कियों को, नाम तेरा आए,
मार तुझे पड़े और कलेजा मेरा ठंडा हो जाए।
sms
विमला , शीला से: बहन तुम्हारे लॉकेट के अंदर क्या है ?
शीला: इसमें मेरे पति के सिर का एक बाल है।
विमला : लेकिन तुम्हारे पति तो अभी जिंदा हैं , फिर यादगार की क्या जरूरत रह गई ?
शीला: दरअसल मेरे पति अब पूरी तरह से गंजे हो चुके हैं।
शीला: इसमें मेरे पति के सिर का एक बाल है।
विमला : लेकिन तुम्हारे पति तो अभी जिंदा हैं , फिर यादगार की क्या जरूरत रह गई ?
शीला: दरअसल मेरे पति अब पूरी तरह से गंजे हो चुके हैं।
sms
राजेश , जसवीर से : अगर आपकी बीवी पर भूत चिपक जाए, तो आप क्या करेंगे ?
जसवीर : मैनू कि करना है , गलती भूत की है खुद भुगतेगा।
जसवीर : मैनू कि करना है , गलती भूत की है खुद भुगतेगा।
chutkele
गधा बड़ा हो या छोटा , होता तो गधा ही है। बड़ा गधा समझा रहा था , लेकिन छोटे गधे को उसकी बात समझ में नहीं आ रही थी।
आखिर बड़ा गधा गुस्से से बोला , ‘ अबे इंसान की औलाद , तुम्हारे भेजे में भूसा भरा है क्या ? कुछ समझता ही नहीं।
आखिर बड़ा गधा गुस्से से बोला , ‘ अबे इंसान की औलाद , तुम्हारे भेजे में भूसा भरा है क्या ? कुछ समझता ही नहीं।
chutkule
सोनम , सनी से : तुमसे शादी करके मैं बर्बाद हो गई। इससे अच्छा, तो मैं किसी भिखारी से शादी कर लेती।
तभी बाहर से आवाज आई : अब तुम आ रही हो, या मैं वापस जाऊं ?
सोनम : कौन ?
बाहर से आवाज आईः भिखारी।
तभी बाहर से आवाज आई : अब तुम आ रही हो, या मैं वापस जाऊं ?
सोनम : कौन ?
बाहर से आवाज आईः भिखारी।
संताः जानते हो , स्वर्ग क्या होता है और नरक क्या ?
बंताः तुम बताओ।
संताः स्वर्ग का मतलब है अमेरिकी आमदनी , किसी अंग्रेज का घर , चाइनीज फूड और हिंदुस्तानी बीवी।
बंताः और नरक ?
संताः नरक है , अमेरिकी पत्नी , इंग्लिश फूड , चीन जैसा घर और हिंदुस्तानी आमदनी।
बंताः और तो सब ठीक है , लेकिन स्वर्ग में यह पत्नी कहां से आ गई ?
बंताः तुम बताओ।
संताः स्वर्ग का मतलब है अमेरिकी आमदनी , किसी अंग्रेज का घर , चाइनीज फूड और हिंदुस्तानी बीवी।
बंताः और नरक ?
संताः नरक है , अमेरिकी पत्नी , इंग्लिश फूड , चीन जैसा घर और हिंदुस्तानी आमदनी।
बंताः और तो सब ठीक है , लेकिन स्वर्ग में यह पत्नी कहां से आ गई ?
chutkule
संता स्टेशन पर अपनी बीवी के साथ ट्रेन का इंतजार कर रहे थे।
तभी स्टेशन पर ' पंजाब मेल ' ट्रेन आ गई।
संता ट्रेन पर चढ़ गए।
संता , बीवी से : जब ‘ पंजाब फीमेल ’ आएगी तो तुम भी आ जाना।
तभी स्टेशन पर ' पंजाब मेल ' ट्रेन आ गई।
संता ट्रेन पर चढ़ गए।
संता , बीवी से : जब ‘ पंजाब फीमेल ’ आएगी तो तुम भी आ जाना।
Subscribe to:
Comments (Atom)